भारत के लिए वरदान बना ट्रंप का टैरिफ! कुल एक्सपोर्ट की तुलना में अमेरिका को 7 गुना बढ़ गया निर्यात

Updated on 18-08-2025
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है। इसका असर आने वाले दिनों में दिखाई देगा। लेकिन अप्रैल-जुलाई के दौरान भारत से अमेरिका को एक्सपोर्ट देश के कुल निर्यात की तुलना में सात गुना बढ़ गया। कॉमर्स डिपार्टमेंट के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जुलाई के दौरान अमेरिका को गुड्स का निर्यात 21% बढ़कर $33.5 अरब हो गया जबकि इस दौरान देश का कुल निर्यात 3% बढ़कर $149.2 अरब रहा। भारत के कुल निर्यात का 22% हिस्सा अमेरिका को जाता है जिस पर 50% टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है। इसमें 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और 25% रूसी तेल की खरीद पर अतिरिक्त टैरिफ है। यह 27 अगस्त से लागू होगा।

हालांकि अमेरिका को एक्सपोर्ट में तेजी ने निर्यातकों को कुछ राहत दी है। अब वे 25% अतिरिक्त टैरिफ लगने की स्थिति में अमेरिकी खरीदारों को कुछ छूट दे सकते हैं। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (AEPC) के अध्यक्ष सुधीर सेखरी ने कहा, 'हमने पिछले एक हफ्ते के दौरान खरीदारों से बात की है। पुराने खरीदारों के मामले में हम ट्रेड को बनाए रखने के लिए कुछ अतिरिक्त छूट देने पर विचार कर रहे हैं। भले ही इसके लिए हमें कुछ समय के लिए अपनी जेब से भुगतान करना पड़ सकता है।'

नुकसान के साथ व्यापार

सेखरी ने कहा कि अमेरिका के साथ 25 अगस्त से शुरू होने वाली बातचीत स्थगित हो गई है, लेकिन हमें आने वाले हफ्तों में कुछ सफलता मिलने की उम्मीद है। अमेरिका ने भारतीय सामान पर 25% टैरिफ लागू कर दिया गया है। निर्यातकों ने मिलकर इसका बोझ उठाया और ट्रेड को बनाए रखा। कुछ लोग तो डेडलाइन से पहले माल भेजने की जल्दी में हैं। अगले दौर के लिए कुछ अनुबंधों में यह शर्त है कि अगर रूस से तेल खरीदने पर लगने वाला 25% अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता है, तो दी जा रही छूट लागू नहीं होगी।
इंडस्ट्री के ज्यादातर लोगों का कहना है कि 50% टैरिफ के साथ ट्रेड करना संभव नहीं है। चमड़ा निर्यात परिषद के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार जालान ने कहा, 'हम 5-7% के बहुत कम मार्जिन पर काम करते हैं। 25% अतिरिक्त टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए भारी छूट देने का सवाल ही कहां है? हम अपना मुनाफा त्याग सकते हैं, लेकिन नुकसान के साथ व्यापार नहीं कर सकते।' उन्होंने कहा कि अमेरिका-रूस की बातचीत से इस जुर्माने के नहीं लगने की उम्मीद जगी है।

नौकरियां जाने का खतरा

भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (Fieo) के अध्यक्ष आर.सी. राल्हन ने निर्यात संवर्धन परिषदों की सोमवार को एक बैठक बुलाई है। इसमें सरकार से समर्थन के लिए एक संयुक्त याचिका तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर निर्यात ऑर्डर कैंसिल हो जाते हैं, तो खासतर एमएसएमई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नौकरियां जाएंगी। हालांकि, अभी तक सब ठीक चल रहा है। वास्तव में जुलाई के निर्यात आंकड़ों से पता चला है कि अमेरिका को शिपमेंट में तेजी आई है

उदाहरण के लिए रत्न और आभूषण एक्सपोर्ट में जुलाई में 28% की वृद्धि देखी गई, जबकि अप्रैल-जुलाई के दौरान 0.7% की गिरावट आई थी। इसी तरह, फार्मा निर्यात जुलाई में 14% बढ़ा जबकि वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों में यह 7.4% था। इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात जुलाई में 13.8% बढ़ जबकि अप्रैल-जुलाई के लिए यह ग्रोथ 6% रही। इसी तरह प्लास्टिक निर्यात जुलाई में 4.4% बढ़ा जबकि अप्रैल-जुलाई में यह ग्रोथ 2.6% रही।

Fieo के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने कहा कि अमेरिकी बाजार का विस्तार हो रहा है और भारतीय निर्यातकों ने भी इस पर ध्यान केंद्रित किया है क्योंकि यहां अच्छा मुनाफा है। AEPC के सेखरी ने कहा कि हर कोई शिपमेंट को जल्दी भेजने की कोशिश कर रहा था। अप्रैल-मई में ऑर्डर बुक अच्छी थी, चाइना+1 के कारण ट्रेड अच्छा दिख रहा था। अचानक ब्रेक लगने से मुश्किल होगी।


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